योगी आदित्यनाथ ने 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश राज्य के 21 वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की[1]
◆मुख्यमंत्री के विभाग
योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री--- गृह, आवास एवं शहरी नियोजन, राजस्व, खाद्य एवं रसद, नागरिक आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, अर्थ एवं संख्या, भूतत्व एवं खनिकर्म, बाढ़ नियंत्रण, कर निबंधन, कारागार, सामान्य प्रशासन, सचिवालय प्रशासन, गोपन, सतर्कता, नियुक्ति, कार्मिक, सूचना, निर्वाचन, संस्थागत वित्त, नियोजन, राज्य संपत्ति, नगर भूमि, उत्तर प्रदेश पुनर्गठन समन्वय, प्रशासनिक सुधार, कार्यक्रम कार्यान्वयन, राष्ट्रीय एकीकरण, अवस्थापना, भाषा, वाह्य सहायतित परियोजना, अभाव, सहायता एवं पुनर्वास, लोक सेवा प्रबंधन, किराया नियंत्रण, उपभोक्ता संरक्षण, बाट माप.
◆उप मुख्यमंत्री और उनके विभाग
1. केशव प्रसाद मौर्य उप मुख्यमंत्री---लोक निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, मनोरंजन कर, सार्वजनिक उद्यम विभाग।
2.डॉ. दिनेश शर्मा उप मुख्यमंत्री--- माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी
◆कैबिनेट मंत्री और उनके विभाग
1. सूर्य प्रताप शाही :-- कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान
2. सुरेश खन्ना : संसदीय कार्य, नगर विकास, शहरी समग्र विकास,नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन
3. स्वामी प्रसाद मौर्य : श्रम एवं सेवा योजन,समन्वय विभाग
4. सतीश महाना : औद्योगिकविकास
5. राजेश अग्रवाल : वित्त
6. रीता बहुगुणा जोशी : महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण, पर्यटन
7. दारा सिंह चौहान : वन एवं पर्यावरण, जन्तु उद्यान, उद्यान
8. धरमपाल सिंह : सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक)
9. एस0पी0 सिंह बघेल : पशुधन, लघु सिंचाई, मत्स्य
10. सत्यदेव पचौरी : खादी, ग्रामोद्योग, रेशम, वस्त्रोद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, निर्यात प्रोत्साहन
11. रमापति शास्त्री : समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण
12. जय प्रकाश सिंह : आबकारी, मद्यनिषेध
13. ओम प्रकाश राजभर : पिछड़ा वर्ग कल्याण, विकलांग जन विकास
14.बृृजेश पाठक : विधि एवं न्याय, अतिरिक्त उर्जा स्रोत, राजनैतिक पेंशन
15. लक्ष्मी नारायण चौधरी : दुग्ध विकास, धमार्थ कार्य, संस्कृति, अल्प संख्यक कल्याण,हज और वक्फ
16. चेतन चौहान : खेल एवं युवा कल्याण, व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विकास
17. श्रीकांत शर्मा : ऊर्जा
18. राजेन्द्र प्रताप सिंह : ग्रामीण अभियंत्रण सेवा
19. सिद्धार्थ नाथ सिंह : चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
20. मुकुट बिहारी वर्मा : सहकारिता
21. आशुतोष टण्डन : प्राविधिक शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा
22. नंद कुमार नंदी : स्टाम्प तथा न्यायालय शुल्क, पंजीयन नागरिक उड्डयन
◆ राज्य मंत्री (स्वतन्त्र प्रभार)और उनके विभाग
1. अनुपमा जायसवाल : बेसिक शिक्षा, बाल विकास एवं पुष्टाहार, राजस्व (एम0ओ0एस0), वित्त (एम0ओ0एस0),
2. सुरेश राणा : गन्ना विकास एवं चीनी मिलें, औद्योगिक विकास (एम0ओ0एस0),
3. उपेन्द्र तिवारी : जल सम्पूर्ति, भूमि विकास एवं जल संसाधन, परती भूमि विकास, वन एवं पर्यावरण, जन्तु उद्यान, उद्यान, सहकारिता (एम0ओ0एस0)
4. डाॅ0 महेन्द्र सिंह : ग्रामीण विकास, समग्र ग्राम विकास, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (एम0ओ0एस0),
5. स्वतंत्रदेव सिंह परिवहन, प्रोटोकला, ऊर्जा (एम0ओ0एस0),
6. भूपेन्द्र सिंह चौधरी : पंचायती राज, लोक निर्माण (एम0ओ0एस0),
7. धरम सिंह सैनी : आयुष, अभाव सहायता एवं पुनर्वास,
8. अनिल राजभर : सैनिक कल्याण, खाद्य प्रसंस्करण, होमगार्डस, प्रांतीय रक्षक दल, नागरिक सुरक्षा
9. स्वाति सिंह : एन0आर0आई0, बाढ़ नियंत्रण कृषि निर्यात, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार, महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण (एम0ओ0एस0) विभाग
◆ राज्य मंत्री और उनके विभाग
1. गुलाबो देवी : समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण
2. जय प्रकाश निषाद : पशुधन एवं मत्स्य, राज्य सम्पत्ति, नगर भूमि
3. अर्चना पाण्डेय : खनन, आबकारी, मद्यनिषेध
4. जय कुमार सिंह जैकी : कारागार, लोक सेवा प्रबंधन
5. अतुल गर्ग : खाद्य-रसद, नागरिक आपूर्ति, किराया नियंत्रण, उपभोक्ता संरक्षण, बाट माप, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन
6. रणवेन्द्र प्रताप सिंह : कृषि, कृषि शिक्षा, कृषि अनुसंधान
7. नीलकंठ तिवारी : विधि-न्याय, सूचना, खेल एवं युवा कल्याण
8. मोहसिन रज़ा : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रानिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, मुस्लिम वक्फ, हज
9. गिरीश यादव : नगर विकास, अभाव सहायता एवं पुनर्वास,
10. बलदेव ओलाख : अल्पसंख्यक कल्याण, सिंचाई, सिंचाई (यांत्रिक)
11. मन्नु कोरी : श्रम सेवा योजना
12. संदीप सिंह : बेसिक, माध्यमिक, उच्च, प्राविधिक, चिकित्सा शिक्षा
13. सुरेश पासी : आवास, व्यवसायिक शिक्षा, कौशल विभाग
Saturday, 17 March 2018
उत्तर प्रदेश में झाील
उत्तर प्रदेश में झाीलों का प्राय: आभाव हैं |
इस प्रदेश की प्रमुख झाीलों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित हैं |
कुमेला झाील : यह झाील अमौसी हवाई अड्डे के पास 500 एकर क्षेत्रा मे फेली हुई है | यह गर्मी में सूख जाती है |
P टाण्डादारी झाील : यह झाील भूकंप की दरार से बनी है | यह जल से भरपूर है | यह वर्षा पर निर्भर है | इसके जल का उपयोग मिर्जापूर नगर में किया जाता है | यह झाील मिर्जापूर से 14 कि.मी. दूर स्थित है |
हिंगवा झाील : इसे गंगा की बेटी के रुप में जाना जाता है | गंगा से अधिक पानी बहाकर यहीं आता है | यह वाराणसी शहर में स्थित है |
मानसी गंगा : गोवर्धन में, गिरिराज पर्वत के पास यह झाील वर्षा के पानी बनी है |
उत्तर प्रदेश: भौगोलिक स्थिति
उत्तर प्रदेश: भौगोलिक स्थिति
उत्तर प्रदेश भारत का सीमांत राज्य है जिसकी उत्तरी सीमा नेपाल को स्पर्श करती है।
उत्तराखंड के गठन के पूर्व इसकी सीमाएं चीन के तिब्बत क्षेत्र से भी जुड़ी थी।
प्राकृतिक रूप् से उत्तर प्रदेश के उत्तर में हिमालय की शिवालिक श्रेणियां, पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण में यमुना नदी तथा विंध्य श्रेणियां और पूर्व में गंडक नदी है।
अवस्थिति भूगर्भिक दृष्टि से उ.प्र. प्राचीनतम गोंडवाना लैंड का भूभाग है।
उ.प्र. के दक्षिण भाग में स्थित पठारी भाग प्रायद्वीपीय भाग का ही अंग है जिसका निर्माण विंध्य क्रम की शैलों द्वारा प्री-कैम्ब्रियन युग मंे हुआ है।
उ.प्र. के उत्तरी भाग पर स्थित शिवालिक श्रेणी के दक्षिण में गंगा, यमुना व अन्य सहायक नदियों का विस्तृत मैदान है।
इसका निर्माण प्लाइस्टोसीन काल में अवसादीकरण से हुआ है।
उ.प्र. का अक्षांशीय विस्तार 23डीग्री 52 उत्तर से 30॰24 उत्तरी अक्षांश के मध्य है। कुल अक्षांशीय विस्तार 6॰32 है। उ.प्र. का देशांतरीय विस्तार 7 05 पूर्व से 84 38 पूर्वी देशांतर के मध्य है। प्रदेश का कुल देशांतरीय विस्तार 7 33 है।उ.प्र. की सीमाएं कंेद्र शासित प्रदेश दिल्ली सहित कुल 9 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश से लगी हुई है।
उ.प्र. की सीमा को स्पर्श करने वाले राज्य है- हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार एवं उत्तराखंड। उ.प्र. की सीमा को स्पर्श करने वाला एकमात्र केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली है। इसकी सीमाएं उ.प्र. के गाजियाबाद एवं गौतमबुद्ध नगर से लगी हुई हैं। प्रदेश की पूर्वी सीमा बिहार एवं झारखंड से लगी हुई है। प्रदेश की उत्तरी सीमा नेपाल के अतिरिक्त उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश से लगी हुई है।
उ.प्र. की पश्चिमी सीमा हरियाणा, राजस्थान तथा केंद्र शासित प्रदेश सीमा मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ को स्पर्श करती है।
उ.प्र. की सबसे लंबी सीमा मध्य प्रदेश से स्पर्श करती है।
उ.प्र. की न्युनतम सीमा रेखा से स्पर्श करने वाला राज्य हिमाचल प्रदेश है।
उ.प्र. का एकमात्र जिला सहारनपुर है जिसकी सीमा हिमाचल प्रदेश से लगती हैै इसके अतिरिक्त इस जिले की सीमा हरियाणा एवं उत्तराखंड से भी लगी है।
उ.प्र. के सर्वाधिक जिलों को स्पर्श करने वाला राज्य मध्य प्रदेश है।
सर्वाधिक प्रदेशों को स्पर्श करने वाला उ.प्र. का एक मात्र जिला सोनभद्र है।
यह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ ,झारखंड एवं बिहार को स्पर्श करता है।
उ.प्र. की सीमा को स्पर्श करने वाला एकमात्र विदेशी राष्ट्र नेपाल है।
उ.प्र. के कुशीनग, महराजगंज, सिद्धार्थ नगर, बलरामपुर, श्रीवास्तव बहराइच, खीरी एवं पीलीभीत जिलों की सीमा नेपाल को स्पर्श करती है।
उ.प्र. का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 2,40,928 वर्ग किमी. है जो भारत के कुल क्षेत्रफल (32,87,263 वर्ग किमी.) के लगभग 7.33प्रतिशत के बराबर है। पूर्व से पश्चिम तक इसकी लंबाई 650 किमी. तथा उत्तर से दक्षिण तक चैड़ाई 240 किमी. है।
क्षेत्रफल की दृष्टि से उ.प्र. का भारत में पांचवां स्थान है।
उ.प्र. से अधिक क्षेत्रफल वाले राज्य है- राजस्थान, मध्य प्रदेश महाराष्ट्र एवं आंध्र प्रदेश।
उ.प्र. का वर्तामान भौगोलिक स्वरूप 9 नवंबर,2000 को अस्तित्व में आया है।
9 नवंबर,2000 केा उ.प्र. के 13 पर्वतीय जिलों को काटकर उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) राज्य का निर्माण किया गया है।
भौतिक विभाग उत्तराखंड के गठन से पूर्व राज्य के तीन भूभाग थे पर्वतीय क्षेत्र, मेदानी क्षेत्र और दक्षिण का पठारी क्षेत्र।
परंतु उत्तराखंड के गठन के बाद पूरा पर्वतीय क्षेत्र, उत्तर प्रदेश से अलग हो गया है और अब इस पर्वतीय क्षेत्र से लगा हुआ भाबर-तराई क्षेत्र ही बचा हुआ है।
उ.प्र. को वर्तामान में मुख्यतः तीन प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है- (1) भाबर एवं तराई का प्रदेश (2) गंगा यमुना का मैदान एवं (3) दक्षिण पठारी प्रदेश।
पश्चिम में सहारनपुर से लेकर पूर्व में देवरिया एवं कुशीनगर (पडरौना ) तक एक पतली सी पट्टी भाबर और तराई कहालाती है।
भाबर क्षेत्र वह पर्वतीय भूभाग है जो कंकड़-पत्थरों से निर्मित है। इसका विस्तार उ.प्र. के बिजनौर, सहारनपुर, पीलीभीत, शाहजहांपुर एवं लखीमपुर खीरी जिलों में है।
पश्चिम में यह क्षेत्र 34 किमी. चैड़ है परंतु पूर्व की ओर बढ़ने के साथ यह संकरा होता जाता है।
तराई क्षेत्र, भाबर के दक्षिण में दलदली एवं गाद मिट्टी वाला क्षेत्र है जो महीन अवसादों से निर्मित है।
जंगली और ऊंची घनी घासों से ढका हुआ तराई क्षेत्र कभी 80 से 90 किमी. तक चैड़ा था तथा इसके अंतर्गत सहारनपुर, बिजनौर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, गोंडा, बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर जिलों के भाग आते थे। इधर कुछ वर्षों से भूमि सुधार कार्यों के कारण इसकी चैड़ाई काफी कम हो गई है जिससे इसका काफी भाग उपजाऊ भूमि के रूप में किसानों को प्राप्त हो गया है।
अब यहां गन्ना , गेहूं, और धान की फसलों रिकाॅर्ड पैदावार दे रही है।
अनेक जगहों पर जूट की भी अच्छी खेती हो रही है।
प्रदेश के ऊंचाई वाले भागों में मिलने वाली प्राचीनतम जलोढ़ मिट्टी को राढ़ (त्ंती) के नाम से जाना जाता हे।
भाबर और तराई के बाद प्रदेश का पूरा मैदानी क्षेत्र नदियों से लाई गई उपजाऊ मिट्टी से बना है। यमुना पार, आगरा और मथुरा जिलों के उन भूभागों के अतिरिक्त जहां अरावली पहाड़ियों के पूर्वी छोर पर अनेक खार और लाल पत्थरों वाली पहाड़ियां मिलती हैं, समग्र भूभाग समतल है। गंगा -यमुना के विस्तृत मैदानी प्रदेश को तीन उप-विभागों में बांटा गया है- 1 गंगा-यमुना का ऊपरी मैदान 2 गंगा का मध्य मैदानी प्रदेश 3 गंगा का पूर्वी मैदान गंगा-यमुना के ऊपरी मैदान का विस्तार लगभग 500 किमी. लंबी एवं 80 किमी. चैड़ी पट्टी के रूप में विस्तृत है।
गंगा-यमुना मे मध्य मैदानी प्रदेश का विस्तार उ.प्र. के सहारनपुर, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, अलिगढ़, हाथरस, मथुरा, आगरा, मैनपुरी, एटा, बदायूं, मुरादाबाद तथा बरेली जिलों में मिलता है।
(नवसृजित 3 जिलों-प्रबुद्ध नगर, पंचशील नगर एवं भीमनगर में थी)। गंगा के पूर्वी मैदान का विस्तार उ.प्र. के वराणसी, जौनपुर एवं संत रविदास नगर में है।
गंगा-यमुना के मैदान का निर्माण काॅप मिट्टी से हुआ है।
गंगा-यमुना के विस्तृत मैदानी प्रदेश की समुद्र तल से औसत ऊंचाई 300 मी. है।
इस विस्तृत मैदान प्रदेश का निर्माण अभिनूतन एवं अतिनूतन युग में नदी घाटी में अवसादीकरण से हुआ है। इस विस्तृत मैदानी प्रदेश का ढाल पश्चिमांचल में उत्तर से दक्षिण की ओर तथा पूर्वांचल में पश्चिमोत्तर से दक्षिण-पूर्व की ओर है । उ.प्र. में दक्षिण पठारी प्रदेश का कुल क्षेत्रफल 45200 वग्र किमी. है। दक्षिण पठारी प्रदेश के अंतर्गत बुंदेलखंड एवं बंधेलख्ंाड के भू-भाग सम्मिलित है। यह क्षेत्र दक्कन के पठार का ही प्रसरण है तथा इस भूभाग की उत्तरी सीमा यमुना तथा गंगा नदी द्वारा निर्धारित है। इसके अंतर्गत झांसी, जालौन, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, ललितपुर और बांदा जिले, इलाहाबाद जिले की मेजा और करछना तहसीलें, गंगा के दक्षिण में पड़ने वाला मिर्जापुर का हिस्सा तथा चंदोली जिले की चकिया तहसील आती है। इस पठारी क्षेत्र की समान्य ऊंचाई 300 मीटर के आसपास है तथा कुछ स्ािानों पर यह ऊंचाई 450 मीटर से भी अधिक है। मिर्जापुर, सोनभद्र की पहाड़ियां लगभग 600 मीटर तक ऊंची है। बुदेलखंड का निर्माण उ.प्र. के दक्षिणी उच्च प्रदेश में विध्य काल की प्राचीनतम नीस चट्टानांे द्वारा तथा निम्न प्रदेशों में नदियों द्वारा निक्षेपित मिट्टी से हुआ है। कैमूर श्रृंखला बुंदेलखंड से लगी हुई है। इसकी रचना विध्यन शैली से हुई है। बुंदेलखंड में लाल रंग की मृदा का विस्तार पाया जाता है। बुंदेलखंड में प्लास नामक घास बहुतायत में पायी जाती है।
बंधेलखंड क्षैत्र की प्रमुख नदी सोन नदी है।बंधेलखंड के उत्तर एवं दक्षिण में क्रमशः सोनपुन एवं रामगढ़ की पहाड़ियां अवस्थित है।
दक्षिण पठारी प्रदेश का ढाल दक्षिण से उत्तर की ओर है। यहां जल प्रवाह सामान्यतः उत्तर-पूर्व की तरफ है। दक्षिण पठारी प्रदेश की प्रमुख नदियां चंबल, बेतवा, केन , सोन एवं टोंस हैं। कम वर्षा के कारण इस पठारी क्षेत्र में वृक्ष-वनस्पतियां छोटी होती हैं।यहां की मुख्य फसलें ज्वार, तिलहन, चना और गेहूं है। उ.प्र. की जलवायु उत्तर प्रदेश जलवायु की दृष्टि से उष्ण प्रधान शीतोष्ण कटिबंध में आता है। यहां की जलवायु उष्ण कटिबंधीय मानसून प्रकार की है। तराई क्षेत्रों में यह नमी लिए रहती है और दक्षिण पठारी क्षेत्र में ग्रीष्म ऋतु में नमी बिल्कुल नहीं रहती है। उ.प्र. को मुख्यतः दो जलवायु प्रदेशों में विभाजित किया जाता है- 1 आर्द एवं उष्ण प्रदेश 2 साधारण आर्द्र एवं उष्ण प्रदेश आर्द्र एवं उष्ण प्रदेश को तराई क्षेत्र (120-180सेमी वार्षिक वर्षा) एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश (100-12 सेमी. तक औसत वार्षिक वर्षा) में विभाजित किया जाता है।
साधरण आर्द्र एवं उष्ण प्रदेश को मध्यवर्ती मैदानी क्षेत्र (80-100 सेमी. औसत वार्षिक वर्षा) पश्चिम मैदानी क्षेत्र(पर्वतीय क्षेत्रों के समीप अधिक तथा द.प. भागों में कम) तथा बुंदेलखंड के पठारी व पहाड़ी प्रदेश (वर्षा की मात्रा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती हैं) में विभाजित किया जाता है ।
कोपेन के अनुसार उ.प्र. में जलवायु का शुष्क शीत वाला मानसूनी प्रकार अर्थात ब्ूह मिलता है। थार्नथ्वेट के अनुसार उ.प्र. में ब्ठू अर्थात सम शीतोष्ण उपार्द्र जलवायु का विस्तार मिलता है।उ.प्र. में मुख्यतः तीन ऋतुएं 1. शीत ऋतु 2. ग्रीष्म ऋतु और 3. वर्षा ऋतु होती है। उ.प्र. में शीत ऋतु अक्टूबर से फरवरी तक रहती है। उ.प्र. मंे शीत ऋतु में सर्वाधिक ठंडा महीना जनवरी रहता है। शीत ऋतु में उ.प्र. का तापमान उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ाया जाता है। उ.प्र. के दक्षिण पठारी भाग में शीत ऋतु का औसत अधिकतम तापमान 28.3डीग्री सेलसियस तथा न्यूनतम तापमान 13.3 डीग्री सेलसियस रहता है। उ.प्र. के पश्चिमी मैदानी एवं पर्वतीय भागों का औसत न्यूनतम तापमान 10 डीग्री से. रहता है।
उ.प्र. के मध्य मैदानी क्षेत्र में शीत ऋतु का औसत अधिकतम तापमान 27.7 डी.से. होता है। उ.प्र. में शीत ऋतु में वर्षा उत्तर पश्चिम से आने वाले चक्रवातोें के कारण होती है जिनकी औसत संख्या 3-5 के मध्य होती है। शीतकालीन चक्रवातों के द्वारा उ.प्र. के उत्तर पश्चिम क्षेत्रों मे 7-10 सेमी. तक वर्षा की प्राप्ति होती है। पूर्वी भाग के जिलों में शीत ऋतु में वर्षा का औसत 100 से 120 सेमी.के बीच रहता है। उ.प्र. में ग्रीष्म ऋतु का औसत अधिकतम तापमान 36-39 डी.से. तथा न्यूनतम तापमान 21-23 डी.से. होता है।
ग्रीष्म ऋतु में कुछ स्ािानों पर तापमान 47डी.से. तक चला जाता है।उ.प्र. के बुंदेलखंड क्षेत्र में सवाधिक औसत तापमान पाया जाता है। इसका कारण इसकी कर्क रेखा से अधिक निकट अवस्थिति का होना हैै। उ.प्र. के झांसी, एवं आगरा जिलों में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है। ग्रीष्म ऋतु में उ.प्र. में पश्चिमी हवाएं तीव्र गति से चलती है; इन शुष्क एवं गर्म हवाओं को ’लू’ कहते हैं। उ.प्र. में वर्षा ऋतु जून के अंतिम सत्पाह से प्रारंभ होकर अक्टूबर तक रहती है।उ.प्र. में सर्वाधिक वर्षा जुलाई एवं अगस्त महीनों मंे होती है। वर्षा ऋत ु में बंगाल की खाड़ी से उठने वाला मानसून जैसे ही उ.प्र. में प्रवेश करता है, इसे ’पूर्वा’ कहते हैं। वर्षा ऋतु का औसत अधिकतम तापमान 32-34 डी.से. तथा औसत न्यूनतम तापमान 25डी.से. रहता है। उ.प्र. की अधिकांश मानसूनी वर्षा बंगाल की खाड़ी की मानसून शाखा से प्राप्त होती है इससे उ.प्र. की कुल वर्षा का लगभग 75-80 प्रतिशत भाग प्राप्त होता है। प्रदेश में लगभग 83 प्रतिशत वर्षा जून से सितंबर के बीच और 17 प्रतिशत जाड़ों में होती है। उ.प्र. में अरब सागर मानसून शाखा से नामपत्र की वर्षा ही प्राप्त होती है। इस शाखा की अधिकांश वर्षा प्रदेश के दक्षिण पठारी भाग मंे होती है। उ.प्र. के पूर्वी मैदानी क्षेत्र की औसत वार्षिक वर्षा 112 सेमी. है।
उ.प्र. के मध्यवर्ती मैदानी क्षेत्र की औसत वार्षिक वर्षा 94 सेमी. है। उ.प्र. के पश्चिम मैदानी क्षेत्र की औसत वार्षिक वर्षा 84सेमी. है। उ.प्र. के दक्षिण पठारी एवं पहाड़ी भागों की औसत वर्षा 91 सेमी. है।
उ.प्र. की संपूर्ण वर्षा का लगभग 60 प्रतिशत जुलाई एवं अगस्त महीनों में प्राप्त होता है। उ.प्र. से मानसून का प्रत्यावर्तन अक्टूबर के प्रथम सप्ताह से होता है। उ.प्र. क मैदानी क्षेत्र में सर्वाधिक वर्षा गोरखपुर (औसत 184.7 सेमी.) में तथा सबसे कम वर्षा मथुरा (औसत 54.4 सेमी.) में होती है।
उत्तर प्रदेश भारत का सीमांत राज्य है जिसकी उत्तरी सीमा नेपाल को स्पर्श करती है।
उत्तराखंड के गठन के पूर्व इसकी सीमाएं चीन के तिब्बत क्षेत्र से भी जुड़ी थी।
प्राकृतिक रूप् से उत्तर प्रदेश के उत्तर में हिमालय की शिवालिक श्रेणियां, पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण में यमुना नदी तथा विंध्य श्रेणियां और पूर्व में गंडक नदी है।
अवस्थिति भूगर्भिक दृष्टि से उ.प्र. प्राचीनतम गोंडवाना लैंड का भूभाग है।
उ.प्र. के दक्षिण भाग में स्थित पठारी भाग प्रायद्वीपीय भाग का ही अंग है जिसका निर्माण विंध्य क्रम की शैलों द्वारा प्री-कैम्ब्रियन युग मंे हुआ है।
उ.प्र. के उत्तरी भाग पर स्थित शिवालिक श्रेणी के दक्षिण में गंगा, यमुना व अन्य सहायक नदियों का विस्तृत मैदान है।
इसका निर्माण प्लाइस्टोसीन काल में अवसादीकरण से हुआ है।
उ.प्र. का अक्षांशीय विस्तार 23डीग्री 52 उत्तर से 30॰24 उत्तरी अक्षांश के मध्य है। कुल अक्षांशीय विस्तार 6॰32 है। उ.प्र. का देशांतरीय विस्तार 7 05 पूर्व से 84 38 पूर्वी देशांतर के मध्य है। प्रदेश का कुल देशांतरीय विस्तार 7 33 है।उ.प्र. की सीमाएं कंेद्र शासित प्रदेश दिल्ली सहित कुल 9 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेश से लगी हुई है।
उ.प्र. की सीमा को स्पर्श करने वाले राज्य है- हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार एवं उत्तराखंड। उ.प्र. की सीमा को स्पर्श करने वाला एकमात्र केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली है। इसकी सीमाएं उ.प्र. के गाजियाबाद एवं गौतमबुद्ध नगर से लगी हुई हैं। प्रदेश की पूर्वी सीमा बिहार एवं झारखंड से लगी हुई है। प्रदेश की उत्तरी सीमा नेपाल के अतिरिक्त उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश से लगी हुई है।
उ.प्र. की पश्चिमी सीमा हरियाणा, राजस्थान तथा केंद्र शासित प्रदेश सीमा मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ को स्पर्श करती है।
उ.प्र. की सबसे लंबी सीमा मध्य प्रदेश से स्पर्श करती है।
उ.प्र. की न्युनतम सीमा रेखा से स्पर्श करने वाला राज्य हिमाचल प्रदेश है।
उ.प्र. का एकमात्र जिला सहारनपुर है जिसकी सीमा हिमाचल प्रदेश से लगती हैै इसके अतिरिक्त इस जिले की सीमा हरियाणा एवं उत्तराखंड से भी लगी है।
उ.प्र. के सर्वाधिक जिलों को स्पर्श करने वाला राज्य मध्य प्रदेश है।
सर्वाधिक प्रदेशों को स्पर्श करने वाला उ.प्र. का एक मात्र जिला सोनभद्र है।
यह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ ,झारखंड एवं बिहार को स्पर्श करता है।
उ.प्र. की सीमा को स्पर्श करने वाला एकमात्र विदेशी राष्ट्र नेपाल है।
उ.प्र. के कुशीनग, महराजगंज, सिद्धार्थ नगर, बलरामपुर, श्रीवास्तव बहराइच, खीरी एवं पीलीभीत जिलों की सीमा नेपाल को स्पर्श करती है।
उ.प्र. का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 2,40,928 वर्ग किमी. है जो भारत के कुल क्षेत्रफल (32,87,263 वर्ग किमी.) के लगभग 7.33प्रतिशत के बराबर है। पूर्व से पश्चिम तक इसकी लंबाई 650 किमी. तथा उत्तर से दक्षिण तक चैड़ाई 240 किमी. है।
क्षेत्रफल की दृष्टि से उ.प्र. का भारत में पांचवां स्थान है।
उ.प्र. से अधिक क्षेत्रफल वाले राज्य है- राजस्थान, मध्य प्रदेश महाराष्ट्र एवं आंध्र प्रदेश।
उ.प्र. का वर्तामान भौगोलिक स्वरूप 9 नवंबर,2000 को अस्तित्व में आया है।
9 नवंबर,2000 केा उ.प्र. के 13 पर्वतीय जिलों को काटकर उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) राज्य का निर्माण किया गया है।
भौतिक विभाग उत्तराखंड के गठन से पूर्व राज्य के तीन भूभाग थे पर्वतीय क्षेत्र, मेदानी क्षेत्र और दक्षिण का पठारी क्षेत्र।
परंतु उत्तराखंड के गठन के बाद पूरा पर्वतीय क्षेत्र, उत्तर प्रदेश से अलग हो गया है और अब इस पर्वतीय क्षेत्र से लगा हुआ भाबर-तराई क्षेत्र ही बचा हुआ है।
उ.प्र. को वर्तामान में मुख्यतः तीन प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है- (1) भाबर एवं तराई का प्रदेश (2) गंगा यमुना का मैदान एवं (3) दक्षिण पठारी प्रदेश।
पश्चिम में सहारनपुर से लेकर पूर्व में देवरिया एवं कुशीनगर (पडरौना ) तक एक पतली सी पट्टी भाबर और तराई कहालाती है।
भाबर क्षेत्र वह पर्वतीय भूभाग है जो कंकड़-पत्थरों से निर्मित है। इसका विस्तार उ.प्र. के बिजनौर, सहारनपुर, पीलीभीत, शाहजहांपुर एवं लखीमपुर खीरी जिलों में है।
पश्चिम में यह क्षेत्र 34 किमी. चैड़ है परंतु पूर्व की ओर बढ़ने के साथ यह संकरा होता जाता है।
तराई क्षेत्र, भाबर के दक्षिण में दलदली एवं गाद मिट्टी वाला क्षेत्र है जो महीन अवसादों से निर्मित है।
जंगली और ऊंची घनी घासों से ढका हुआ तराई क्षेत्र कभी 80 से 90 किमी. तक चैड़ा था तथा इसके अंतर्गत सहारनपुर, बिजनौर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, गोंडा, बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर जिलों के भाग आते थे। इधर कुछ वर्षों से भूमि सुधार कार्यों के कारण इसकी चैड़ाई काफी कम हो गई है जिससे इसका काफी भाग उपजाऊ भूमि के रूप में किसानों को प्राप्त हो गया है।
अब यहां गन्ना , गेहूं, और धान की फसलों रिकाॅर्ड पैदावार दे रही है।
अनेक जगहों पर जूट की भी अच्छी खेती हो रही है।
प्रदेश के ऊंचाई वाले भागों में मिलने वाली प्राचीनतम जलोढ़ मिट्टी को राढ़ (त्ंती) के नाम से जाना जाता हे।
भाबर और तराई के बाद प्रदेश का पूरा मैदानी क्षेत्र नदियों से लाई गई उपजाऊ मिट्टी से बना है। यमुना पार, आगरा और मथुरा जिलों के उन भूभागों के अतिरिक्त जहां अरावली पहाड़ियों के पूर्वी छोर पर अनेक खार और लाल पत्थरों वाली पहाड़ियां मिलती हैं, समग्र भूभाग समतल है। गंगा -यमुना के विस्तृत मैदानी प्रदेश को तीन उप-विभागों में बांटा गया है- 1 गंगा-यमुना का ऊपरी मैदान 2 गंगा का मध्य मैदानी प्रदेश 3 गंगा का पूर्वी मैदान गंगा-यमुना के ऊपरी मैदान का विस्तार लगभग 500 किमी. लंबी एवं 80 किमी. चैड़ी पट्टी के रूप में विस्तृत है।
गंगा-यमुना मे मध्य मैदानी प्रदेश का विस्तार उ.प्र. के सहारनपुर, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, अलिगढ़, हाथरस, मथुरा, आगरा, मैनपुरी, एटा, बदायूं, मुरादाबाद तथा बरेली जिलों में मिलता है।
(नवसृजित 3 जिलों-प्रबुद्ध नगर, पंचशील नगर एवं भीमनगर में थी)। गंगा के पूर्वी मैदान का विस्तार उ.प्र. के वराणसी, जौनपुर एवं संत रविदास नगर में है।
गंगा-यमुना के मैदान का निर्माण काॅप मिट्टी से हुआ है।
गंगा-यमुना के विस्तृत मैदानी प्रदेश की समुद्र तल से औसत ऊंचाई 300 मी. है।
इस विस्तृत मैदान प्रदेश का निर्माण अभिनूतन एवं अतिनूतन युग में नदी घाटी में अवसादीकरण से हुआ है। इस विस्तृत मैदानी प्रदेश का ढाल पश्चिमांचल में उत्तर से दक्षिण की ओर तथा पूर्वांचल में पश्चिमोत्तर से दक्षिण-पूर्व की ओर है । उ.प्र. में दक्षिण पठारी प्रदेश का कुल क्षेत्रफल 45200 वग्र किमी. है। दक्षिण पठारी प्रदेश के अंतर्गत बुंदेलखंड एवं बंधेलख्ंाड के भू-भाग सम्मिलित है। यह क्षेत्र दक्कन के पठार का ही प्रसरण है तथा इस भूभाग की उत्तरी सीमा यमुना तथा गंगा नदी द्वारा निर्धारित है। इसके अंतर्गत झांसी, जालौन, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, ललितपुर और बांदा जिले, इलाहाबाद जिले की मेजा और करछना तहसीलें, गंगा के दक्षिण में पड़ने वाला मिर्जापुर का हिस्सा तथा चंदोली जिले की चकिया तहसील आती है। इस पठारी क्षेत्र की समान्य ऊंचाई 300 मीटर के आसपास है तथा कुछ स्ािानों पर यह ऊंचाई 450 मीटर से भी अधिक है। मिर्जापुर, सोनभद्र की पहाड़ियां लगभग 600 मीटर तक ऊंची है। बुदेलखंड का निर्माण उ.प्र. के दक्षिणी उच्च प्रदेश में विध्य काल की प्राचीनतम नीस चट्टानांे द्वारा तथा निम्न प्रदेशों में नदियों द्वारा निक्षेपित मिट्टी से हुआ है। कैमूर श्रृंखला बुंदेलखंड से लगी हुई है। इसकी रचना विध्यन शैली से हुई है। बुंदेलखंड में लाल रंग की मृदा का विस्तार पाया जाता है। बुंदेलखंड में प्लास नामक घास बहुतायत में पायी जाती है।
बंधेलखंड क्षैत्र की प्रमुख नदी सोन नदी है।बंधेलखंड के उत्तर एवं दक्षिण में क्रमशः सोनपुन एवं रामगढ़ की पहाड़ियां अवस्थित है।
दक्षिण पठारी प्रदेश का ढाल दक्षिण से उत्तर की ओर है। यहां जल प्रवाह सामान्यतः उत्तर-पूर्व की तरफ है। दक्षिण पठारी प्रदेश की प्रमुख नदियां चंबल, बेतवा, केन , सोन एवं टोंस हैं। कम वर्षा के कारण इस पठारी क्षेत्र में वृक्ष-वनस्पतियां छोटी होती हैं।यहां की मुख्य फसलें ज्वार, तिलहन, चना और गेहूं है। उ.प्र. की जलवायु उत्तर प्रदेश जलवायु की दृष्टि से उष्ण प्रधान शीतोष्ण कटिबंध में आता है। यहां की जलवायु उष्ण कटिबंधीय मानसून प्रकार की है। तराई क्षेत्रों में यह नमी लिए रहती है और दक्षिण पठारी क्षेत्र में ग्रीष्म ऋतु में नमी बिल्कुल नहीं रहती है। उ.प्र. को मुख्यतः दो जलवायु प्रदेशों में विभाजित किया जाता है- 1 आर्द एवं उष्ण प्रदेश 2 साधारण आर्द्र एवं उष्ण प्रदेश आर्द्र एवं उष्ण प्रदेश को तराई क्षेत्र (120-180सेमी वार्षिक वर्षा) एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश (100-12 सेमी. तक औसत वार्षिक वर्षा) में विभाजित किया जाता है।
साधरण आर्द्र एवं उष्ण प्रदेश को मध्यवर्ती मैदानी क्षेत्र (80-100 सेमी. औसत वार्षिक वर्षा) पश्चिम मैदानी क्षेत्र(पर्वतीय क्षेत्रों के समीप अधिक तथा द.प. भागों में कम) तथा बुंदेलखंड के पठारी व पहाड़ी प्रदेश (वर्षा की मात्रा पूर्व से पश्चिम की ओर घटती जाती हैं) में विभाजित किया जाता है ।
कोपेन के अनुसार उ.प्र. में जलवायु का शुष्क शीत वाला मानसूनी प्रकार अर्थात ब्ूह मिलता है। थार्नथ्वेट के अनुसार उ.प्र. में ब्ठू अर्थात सम शीतोष्ण उपार्द्र जलवायु का विस्तार मिलता है।उ.प्र. में मुख्यतः तीन ऋतुएं 1. शीत ऋतु 2. ग्रीष्म ऋतु और 3. वर्षा ऋतु होती है। उ.प्र. में शीत ऋतु अक्टूबर से फरवरी तक रहती है। उ.प्र. मंे शीत ऋतु में सर्वाधिक ठंडा महीना जनवरी रहता है। शीत ऋतु में उ.प्र. का तापमान उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ाया जाता है। उ.प्र. के दक्षिण पठारी भाग में शीत ऋतु का औसत अधिकतम तापमान 28.3डीग्री सेलसियस तथा न्यूनतम तापमान 13.3 डीग्री सेलसियस रहता है। उ.प्र. के पश्चिमी मैदानी एवं पर्वतीय भागों का औसत न्यूनतम तापमान 10 डीग्री से. रहता है।
उ.प्र. के मध्य मैदानी क्षेत्र में शीत ऋतु का औसत अधिकतम तापमान 27.7 डी.से. होता है। उ.प्र. में शीत ऋतु में वर्षा उत्तर पश्चिम से आने वाले चक्रवातोें के कारण होती है जिनकी औसत संख्या 3-5 के मध्य होती है। शीतकालीन चक्रवातों के द्वारा उ.प्र. के उत्तर पश्चिम क्षेत्रों मे 7-10 सेमी. तक वर्षा की प्राप्ति होती है। पूर्वी भाग के जिलों में शीत ऋतु में वर्षा का औसत 100 से 120 सेमी.के बीच रहता है। उ.प्र. में ग्रीष्म ऋतु का औसत अधिकतम तापमान 36-39 डी.से. तथा न्यूनतम तापमान 21-23 डी.से. होता है।
ग्रीष्म ऋतु में कुछ स्ािानों पर तापमान 47डी.से. तक चला जाता है।उ.प्र. के बुंदेलखंड क्षेत्र में सवाधिक औसत तापमान पाया जाता है। इसका कारण इसकी कर्क रेखा से अधिक निकट अवस्थिति का होना हैै। उ.प्र. के झांसी, एवं आगरा जिलों में सबसे अधिक गर्मी पड़ती है। ग्रीष्म ऋतु में उ.प्र. में पश्चिमी हवाएं तीव्र गति से चलती है; इन शुष्क एवं गर्म हवाओं को ’लू’ कहते हैं। उ.प्र. में वर्षा ऋतु जून के अंतिम सत्पाह से प्रारंभ होकर अक्टूबर तक रहती है।उ.प्र. में सर्वाधिक वर्षा जुलाई एवं अगस्त महीनों मंे होती है। वर्षा ऋत ु में बंगाल की खाड़ी से उठने वाला मानसून जैसे ही उ.प्र. में प्रवेश करता है, इसे ’पूर्वा’ कहते हैं। वर्षा ऋतु का औसत अधिकतम तापमान 32-34 डी.से. तथा औसत न्यूनतम तापमान 25डी.से. रहता है। उ.प्र. की अधिकांश मानसूनी वर्षा बंगाल की खाड़ी की मानसून शाखा से प्राप्त होती है इससे उ.प्र. की कुल वर्षा का लगभग 75-80 प्रतिशत भाग प्राप्त होता है। प्रदेश में लगभग 83 प्रतिशत वर्षा जून से सितंबर के बीच और 17 प्रतिशत जाड़ों में होती है। उ.प्र. में अरब सागर मानसून शाखा से नामपत्र की वर्षा ही प्राप्त होती है। इस शाखा की अधिकांश वर्षा प्रदेश के दक्षिण पठारी भाग मंे होती है। उ.प्र. के पूर्वी मैदानी क्षेत्र की औसत वार्षिक वर्षा 112 सेमी. है।
उ.प्र. के मध्यवर्ती मैदानी क्षेत्र की औसत वार्षिक वर्षा 94 सेमी. है। उ.प्र. के पश्चिम मैदानी क्षेत्र की औसत वार्षिक वर्षा 84सेमी. है। उ.प्र. के दक्षिण पठारी एवं पहाड़ी भागों की औसत वर्षा 91 सेमी. है।
उ.प्र. की संपूर्ण वर्षा का लगभग 60 प्रतिशत जुलाई एवं अगस्त महीनों में प्राप्त होता है। उ.प्र. से मानसून का प्रत्यावर्तन अक्टूबर के प्रथम सप्ताह से होता है। उ.प्र. क मैदानी क्षेत्र में सर्वाधिक वर्षा गोरखपुर (औसत 184.7 सेमी.) में तथा सबसे कम वर्षा मथुरा (औसत 54.4 सेमी.) में होती है।
UP festivals
त्योहार
इलाहाबाद में प्रत्येक बारहवें वर्ष कुंभ मेला आयोजित होता है
जो कि संभवत: दुनिया का सबसे बड़ा मेला है।
इसके अलावा इलाहाबाद में प्रत्येक 6 साल में अर्द्ध कुंभ मेले का आयोजन भी होता है।
इलाहाबाद में ही प्रत्येक वर्ष जनवरी में माघ मेला भी आयोजित होता है, जहां बड़ी संख्या में लोग संगम में डुबकी लगाते हैं।
अन्य मेलों में मथुरा, वृंदावन व अयोध्या के झूला मेले शामिल हैं, जिनमें प्रतिमाओं को सोने एवं चांदी के झूलों में रखा जाता है।
ये झूला मेले एक पखवाड़े तक चलते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा में डुबकी लगाना अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसके लिए गढ़मुक्तेश्वर, सोरन, राजघाट, काकोरा, बिठूर, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी और अयोध्या में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं।
आगरा जिले के बटेश्वर कस्बे में पशुओं का प्रसिद्ध मेला लगता है।
बाराबंकी जिले का देवा मेला मुस्लिम संत वारिस अली शाह के कारण काफी प्रसिद्ध हो गया है।
इसके अतिरिक्त यहां हिंदू तथा मुस्लिमों के सभी प्रमुख त्यौहारों को राज्य भर में मनाया जाता है।
इलाहाबाद में प्रत्येक बारहवें वर्ष कुंभ मेला आयोजित होता है
जो कि संभवत: दुनिया का सबसे बड़ा मेला है।
इसके अलावा इलाहाबाद में प्रत्येक 6 साल में अर्द्ध कुंभ मेले का आयोजन भी होता है।
इलाहाबाद में ही प्रत्येक वर्ष जनवरी में माघ मेला भी आयोजित होता है, जहां बड़ी संख्या में लोग संगम में डुबकी लगाते हैं।
अन्य मेलों में मथुरा, वृंदावन व अयोध्या के झूला मेले शामिल हैं, जिनमें प्रतिमाओं को सोने एवं चांदी के झूलों में रखा जाता है।
ये झूला मेले एक पखवाड़े तक चलते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंगा में डुबकी लगाना अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसके लिए गढ़मुक्तेश्वर, सोरन, राजघाट, काकोरा, बिठूर, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी और अयोध्या में बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं।
आगरा जिले के बटेश्वर कस्बे में पशुओं का प्रसिद्ध मेला लगता है।
बाराबंकी जिले का देवा मेला मुस्लिम संत वारिस अली शाह के कारण काफी प्रसिद्ध हो गया है।
इसके अतिरिक्त यहां हिंदू तथा मुस्लिमों के सभी प्रमुख त्यौहारों को राज्य भर में मनाया जाता है।
UP ki mitti ka sanchipt vivran
उत्तर प्रदेश की मिट्टी संक्षिप्त विवरण
उत्तर प्रदेश की मिट्टी को दो प्रमुखत: वर्गों में बांटा जा सकता है |
1) कांप मिट्टी
2) मिश्रित लाल और काली मिट्टी
1) कांप मिट्टी : सिन्धु गंगा के मैदान में यह मिट्टी दो प्रकार में पायी जाती है, पुरानी - कांप मिट्टी "बांगर" एवं नई कांप मिट्टी "खादर" | इन मिट्टी ओं को निन्मलिखित विभागों में बाटा जा सकता है -
अ) पश्चिम क्षेत्र - यह मिट्टी छिछली है, इसमें कंकड़, पत्थर बड़ी मात्रा में पाये जाते है और सामान्यत: यह मिट्टी अम्लीय है | इसके अंन्तर्गत सहारनपूर, मुजप्फर नगर, मेरठ, बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली और पीलीभीत जिले आते है |
ब) केंद्रीय क्षेत्र - यह मिट्टी बलुई-चिकनी है तथा इसमे अम्ल भी होता है | इसके अंन्तर्गत खाीरी, सीतापूर, लखनऊ, बाराबंकी, जौनपुर, आजमगढ़ तथा कानपूर जिले आते है |
क) पूर्वी क्षेत्र - जल-प्लावित नदी के किनारे पर पाई जाने वाली मिट्टी को ढूह कहते है | मांट मिट्टी स्थानिक नाम है | मांट मिट्टी चिकनी बुलई होती है और उसमे चूना अधिक होता है | इसकी जल-धारण शक्ती अधिक होती है |
2) मिश्रित लाल और काली मिट्टी : काली मिट्टी को सामान्यत: मार और काबर कहते है | यह चिपचिपी तथा कैल्केरियायुक्त और उर्वरा होती है |
उत्तर प्रदेश की मिट्टी को दो प्रमुखत: वर्गों में बांटा जा सकता है |
1) कांप मिट्टी
2) मिश्रित लाल और काली मिट्टी
1) कांप मिट्टी : सिन्धु गंगा के मैदान में यह मिट्टी दो प्रकार में पायी जाती है, पुरानी - कांप मिट्टी "बांगर" एवं नई कांप मिट्टी "खादर" | इन मिट्टी ओं को निन्मलिखित विभागों में बाटा जा सकता है -
अ) पश्चिम क्षेत्र - यह मिट्टी छिछली है, इसमें कंकड़, पत्थर बड़ी मात्रा में पाये जाते है और सामान्यत: यह मिट्टी अम्लीय है | इसके अंन्तर्गत सहारनपूर, मुजप्फर नगर, मेरठ, बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली और पीलीभीत जिले आते है |
ब) केंद्रीय क्षेत्र - यह मिट्टी बलुई-चिकनी है तथा इसमे अम्ल भी होता है | इसके अंन्तर्गत खाीरी, सीतापूर, लखनऊ, बाराबंकी, जौनपुर, आजमगढ़ तथा कानपूर जिले आते है |
क) पूर्वी क्षेत्र - जल-प्लावित नदी के किनारे पर पाई जाने वाली मिट्टी को ढूह कहते है | मांट मिट्टी स्थानिक नाम है | मांट मिट्टी चिकनी बुलई होती है और उसमे चूना अधिक होता है | इसकी जल-धारण शक्ती अधिक होती है |
2) मिश्रित लाल और काली मिट्टी : काली मिट्टी को सामान्यत: मार और काबर कहते है | यह चिपचिपी तथा कैल्केरियायुक्त और उर्वरा होती है |
UP me faslo ke pramukh utpadak sthan
1.गेहु =- देश के गेंहू उत्पादन में उत्तर प्रदेश का पहला स्थान हे | मेरठ, बुलन्दशहर, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़ मुजप्फर नगर, मुरादाबाद, इटावा, कानपुर, फर्रुखाबाद
2.धान (चावल)=- संम्पूर्ण देश में उत्पादन का 15% धान उत्पादित करने वाले राज्य स्थान दुसरा हे | पीलीभीत, सुलतानपूर देवरिया, जयप्रकाश नगर, बहराइच, बस्ती, रायबरेली, मऊ, बलिया, लखनऊ, महाराजगंज |
3.बाजरा =-आगरा, मथुरा, बदायू, अलीगढ़, मुरादाबाद, फिरोदाबाद, एटा, मैनपुरी, इटावा, कानपुर, शाहजहांपूर, प्रतापगढ, गाजीपूर
4.जौ =-वाराणसी, अजमगढ, जौनपूर, बलिया, मऊ, गाजीपूर, गोरखपूर, प्रतापगढ, प्रयागराज - इलाहाबाद
5.मक्का =- मेरठ, गाजियाबाद, बुलन्दश्हर, फर्रुदाबाद, जयप्रकाश नगर, जौनपूर, एटा, फिरोदाबाद, मैनपुरी
6.चना =- राज्य में कम मात्रा में उत्पादन होने वाली फसल | हमीपूर, बांदा, झाांसी, ललीतपूर, जालौन, मिर्जापूर, सोनभद्र, फतेहपुर, कानपुर, सीतापूर, बाराबंकी, प्रयागराज - इलाहाबाद और आगरा
7.अरहर =- वाराणसी, झांसी, ललितपूर, प्रयागपुर, प्रयागराज - इलाहाबाद, लखनऊ
8.गन्ना =- गन्ना उत्पादन की दृष्टी से उत्तर प्रदेश का भारत में पहला स्थान हे | जहां देश का लगभग 48% गन्ना होता हे | राज्य का तराई क्षेत्र और गंगा का दोआब |
9.मूंगफळी =- सीतापूर, हरदोई, एटा, बदायू, मुराबाद
10.अलसी =- मिर्जापूर, सोनभद्र, प्रयागराज - इलाहाबाद, जयप्रकाशनगर, बहराईच और हमीपूर
11.सरसों =- जयप्रकाशनगर, बहराईच, मिर्जापूर, सोनभद्र, कानपूर, सीतापूर, सहारनपूर, एटा, मेरठ, फैजाबाद, इटावा, सुल्तानपूर, मथुरा, अलीगढ, बुलन्दशहर
12.कपास =- सहारनपूर, मुजप्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, अलीगढ़, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कानपुर, रामपुर, बरेली, मुरादाबाद, मथुरा, मैनपूरी और फर्रुखाबाद
13.जूट =- बहराइच, महाराजगंज, देवरिया, जयप्रकाश नगर, सीतापूर और लखीमपूर खीरी
14.तम्बाकू =- वाराणसी, मेरठ, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, मैनपूरी, सहारनपूर और फर्रुखाबाद
2.धान (चावल)=- संम्पूर्ण देश में उत्पादन का 15% धान उत्पादित करने वाले राज्य स्थान दुसरा हे | पीलीभीत, सुलतानपूर देवरिया, जयप्रकाश नगर, बहराइच, बस्ती, रायबरेली, मऊ, बलिया, लखनऊ, महाराजगंज |
3.बाजरा =-आगरा, मथुरा, बदायू, अलीगढ़, मुरादाबाद, फिरोदाबाद, एटा, मैनपुरी, इटावा, कानपुर, शाहजहांपूर, प्रतापगढ, गाजीपूर
4.जौ =-वाराणसी, अजमगढ, जौनपूर, बलिया, मऊ, गाजीपूर, गोरखपूर, प्रतापगढ, प्रयागराज - इलाहाबाद
5.मक्का =- मेरठ, गाजियाबाद, बुलन्दश्हर, फर्रुदाबाद, जयप्रकाश नगर, जौनपूर, एटा, फिरोदाबाद, मैनपुरी
6.चना =- राज्य में कम मात्रा में उत्पादन होने वाली फसल | हमीपूर, बांदा, झाांसी, ललीतपूर, जालौन, मिर्जापूर, सोनभद्र, फतेहपुर, कानपुर, सीतापूर, बाराबंकी, प्रयागराज - इलाहाबाद और आगरा
7.अरहर =- वाराणसी, झांसी, ललितपूर, प्रयागपुर, प्रयागराज - इलाहाबाद, लखनऊ
8.गन्ना =- गन्ना उत्पादन की दृष्टी से उत्तर प्रदेश का भारत में पहला स्थान हे | जहां देश का लगभग 48% गन्ना होता हे | राज्य का तराई क्षेत्र और गंगा का दोआब |
9.मूंगफळी =- सीतापूर, हरदोई, एटा, बदायू, मुराबाद
10.अलसी =- मिर्जापूर, सोनभद्र, प्रयागराज - इलाहाबाद, जयप्रकाशनगर, बहराईच और हमीपूर
11.सरसों =- जयप्रकाशनगर, बहराईच, मिर्जापूर, सोनभद्र, कानपूर, सीतापूर, सहारनपूर, एटा, मेरठ, फैजाबाद, इटावा, सुल्तानपूर, मथुरा, अलीगढ, बुलन्दशहर
12.कपास =- सहारनपूर, मुजप्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, अलीगढ़, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कानपुर, रामपुर, बरेली, मुरादाबाद, मथुरा, मैनपूरी और फर्रुखाबाद
13.जूट =- बहराइच, महाराजगंज, देवरिया, जयप्रकाश नगर, सीतापूर और लखीमपूर खीरी
14.तम्बाकू =- वाराणसी, मेरठ, गाजियाबाद, बुलन्दशहर, मैनपूरी, सहारनपूर और फर्रुखाबाद
UP ki fasle
1.रबी की फसल=- {गेहू, जौ, मटर, चना, तम्बाकू, सरसों, लाही, आलू }
2.खरीफ की फसल=- {ज्व्यार, बाजरा, मक्का, कपास, धान, गन्ना, सनई, दलहन}
3.जायद की फसल=- {तम्बाकू, तरबूज, काशीफल, ककड़ी, प्याज}
2.खरीफ की फसल=- {ज्व्यार, बाजरा, मक्का, कपास, धान, गन्ना, सनई, दलहन}
3.जायद की फसल=- {तम्बाकू, तरबूज, काशीफल, ककड़ी, प्याज}
UP general knowledge
◆उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है।
◆ उत्तर प्रदेश मे कुल जिलो की संख्या 75 तथा मंडल 18 है।
◆ उत्तर प्रदेश का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 2,40,928 वर्ग किमी है, जोकि भारत के कुल क्षेत्रफल (32,87,263 वर्ग किमी) के लगभग 7.33% के बराबर है।
◆ उत्तर प्रदेश का अक्षांशीय विस्तार 30°52' से 30°24' उत्तरी अक्षांश के मध्य है।
◆ उत्तर प्रदेश का देशान्तरीय विस्तार 77°5' पूर्व से 84°38' पूर्वी देशान्तर के मध्य है।
◆ उत्तर प्रदेश की सीमाएँ केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली सहित कुल 9 राज्यों से लगी हुई हैं।
◆ उत्तर प्रदेश की सीमा को स्पर्श करने वाले राज्य निम्न हैं - हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, बिहार एवं उत्तराखण्ड।
◆ उत्तर प्रदेश की सीमा को स्पर्श करने वाले एकमात्र केन्द्र शासित प्रदेश दिल्ली है। इसकी सीमाएँ प्रदेश के गाजियाबाद एवं गौतमबुद्ध नगर से लगी हुई हैं।
◆ उत्तर प्रदेश की सबसे लम्बी सीमा मध्य प्रदेश से और न्यूनतम सीमा रेखा हिमाचल प्रदेश से स्पर्श करती है।
◆ सर्वाधिक प्रदेशों को स्पर्श करने वाला उत्तर प्रदेश का एकमात्र जिला सोनभद्र है। यह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ झारखण्ड एवं बिहार को स्पर्श करता है।
◆ सबसे कम जिलों को स्पर्श करने वाला जिला ललितपुर है।
◆ उत्तर प्रदेश में स्थित इलाहाबाद उच्च न्यायालय एशिया का सबसे बड़ा उच्च न्यायालय है।
◆ उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक लोक सभा व राज्य सभा के सदस्य चुने जाते हैं।
◆ उत्तर प्रदेश को वर्तमान में मुख्यत: तीन प्राकृतिक प्रदेशों में विभाजित किया गया है– (i) भाबर एवं तराई का प्रदेश, (ii) गंगा-यमुना का मैदान एवं (iii) दक्षिण का पठारी प्रदेश।
◆ उत्तर प्रदेश में मुख्यत: तीन ऋतुएं-(i) शीत ऋतु, (ii) ग्रीष्म ऋतु और (iii) वर्षा ऋतु होती हैं।
◆ उत्तर प्रदेश में शीत ऋतु अक्टूबर से फरवरी और ग्रीष्म ऋतु मार्च से मध्य जून तक रहती है।
◆ उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक वर्षा जुलाई एवं अगस्त महीनों में होती है।
◆ उत्तर प्रदेश की अधिकांश मानसूनी वर्षा बंगाल की खाड़ी की मानसून शाखा से प्राप्त होती है इससे प्रदेश की कुल वर्षा का लगभग 75%-80% भाग प्राप्त होता है।
◆ उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्र में सर्वाधिक वर्षा गोरखपुर (औसम 184.7 सेमी) में तथा सबसे कम वर्षा मथुरा (औसम 54.4 सेमी) में होती है।
◆ राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है। जिसमें चावल, गेहूँ, ज्वार, बाजरा, जौ और गन्ना राज्य की मुख्य फ़सलें हैं।
◆ उत्तर प्रदेश में दोमट एवं बलुई मिट्टी को क्षेत्रीय भाषा में सिक्टा, करियाल एवं धनका भी कहते हैं।
◆ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, गोमती नदी के किनारे ही स्थित है।
◆उत्तर प्रदेश में खनिज मुख्यत: दक्षिण के पठारी क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
◆ उत्तर प्रदेश में चूना पत्थर का उत्पादन मिर्जापुर जिले के गुरूमा-कनाच-बापुहारी एवं सोनभद्र जिले के कजरहट में किया जाता है।
◆ उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद नगर चूड़ियाँ बनाने हेतु विश्वविख्यात है।
◆ उत्तर प्रदेश में एल्यूमीनियम उद्योग का प्रमुख केन्द्र रेनूकूट (सोनभद्र) है।
◆ उत्तर प्रदेश का मैनचेस्टर कानपुर को कहा जाता है।
◆ रेशम वस्त्र उद्योग प्रदेश के वाराणसी, इटावा, मोदीनगर, मिर्जापुर, प्रतापगढ़ एवं शाहजहाँपुर जिलों में स्थित है।
◆ उत्तर प्रदेश में चमड़ा उद्योग का प्रमुख केन्द्र कानपुर है।
◆ उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक सिटी की स्थापना नोएडा में की गई है।
◆ उत्तर प्रदेश राज्य का पहला 'निर्यात संवर्द्धन औद्योगिक पार्क' ग्रेटर नोएडा में स्थापित किया गया है।
◆ उत्तर प्रदेश के प्रथम फिल्म सेंटर का शिलान्यास ओखला औद्योगिक क्षेत्र में किया गया है।
◆ उत्तर प्रदेश के लघु उद्योग विकास निगम' द्वारा हापुड़, बाराबंकी, वाराणसी तथा सहारनपुर में 'एग्रोपार्क' विकसित किए गए हैं।
◆ उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम की स्थापना 1 नवम्बर, 1954 को कानपुर में की गई है।
◆उत्तर प्रदेश में एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान दुधवा (टाइगर रिजर्व) है।
◆ उत्तर प्रदेश वन निगम की स्थापना 25 नवम्बर, 1974 को की गई थी।
◆ उत्तर प्रदेश से होकर गुजरने वाला सबसे लम्बा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 है, जो दिल्ली से कोलकाता तक जाता है।
◆ यमुना एक्सप्रेस-वे (पूर्व नाम 'ताज एक्सप्रेस-वे) उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस एवं आगरा जिलों से होकर गुजरता है।
◆ उत्तर प्रदेश में रेलमार्गों की कुल लम्बाई 8,763 किमी (31 मार्च, 2011) है। यह भारत में सबसे अधिक है। वर्ष 2003 में इलाहाबाद को उत्तर-मध्य क्षेत्र का मुख्यालय बनाया गया है।
◆ उत्तर प्रदेश की गंगा, यमुना, घाघरा तथा गोमती नदियों में जल परिवहन की सुविधा उपलब्ध है।
UP me first
1.
उत्तर प्रदेश की प्रथम महिला मुख्यमंत्राी का नाम सुचेता कृपलानी है.
2.
उत्तर प्रदेश की पहिला राज्यपाल महिला श्रीमती सरोजनी नायडू थी
3.
उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री श्री गोविन्द बल्लभ पंत थे.
4.
उत्तर प्रदेश का प्रथम हिंदी दैनिक समाचार पत्र हिन्दोस्तान का प्रकाशन 1887 ई मे प्रतापगढ़ में हुआ जिसे कालाकांकर के राजा रामपाल सिंह ने शुरु किया था
5.
उत्तर प्रदेश का प्रथम हिंदी साप्ताहिक ‘बनारस अखबार’ जनवरी 1945 में काशी बनारस से प्रकाशित हुआ
6.
उत्तर प्रदेश में प्रथम अंग्रेजी दैनिक ‘लीडर’ का प्रकाशन सन 1990 ई में पं. मदनमोहन मालवीय ने इलाहाबाद से प्रारंभ किया
7.
उत्तर प्रदेश के हिंदी के प्रथम गंभीर चिन्तन निबंधकार और आलोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल थे
8.
उत्तर प्रदेश का प्रथम विश्व विदयालय इलाहाबाद विश्व विदयालय है जिसकी स्थापना 1887 ई मे हुई थी1791 में बनारस में रेजिडेंट डेकन ने प्रथम संस्कृत महाविदयालय की स्थापना की थी जिसमें हिन्दु धर्म, साहित्य एवं कानुन की शिक्षा की व्यवस्था थी
9.
उत्तर प्रदेश तथा भारत की आर्मी की प्रथम महिला ब्रिगेड रानी झाांसी ब्रिगेड थी, जो 23 अक्टूबर 1943 ई को ब्रिगेड बनी
10.
भारत वर्ष तथा उत्तर प्रदेश में 1956 ई मे प्रथम खेलकूद परिषद की स्थापना हुई थी
11.
प्रदेश की पहली महिला वकील कारनेलिया सोराबजी थी जो 1923 ई में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकील थी
12.
भारत वर्ष तथा उत्तर प्रदेश में सर्व प्रथम ट्रैक्टर का प्रयोग उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खोरी में सरदार जोगेंद्र सिंह ने 1904 में किया था
13.
भारत वर्ष तथा उत्तर प्रदेश में सबसे पहली सीधी ट्रंक डयलिंग सेवा लखनऊ कानपुर के बीच 26 नवम्बर 1960 ई को शुरु की गई थी
14.
भारत का पहला ग्रामीण बँक मुरादाबाद और गोरखपुर में 2 अक्टुंबर 1975 को खुला
15.
भारत का पहला राष्ट्रीय पार्क 1936 में स्थापित हेली पार्क है जिसे आजादी के बाद रामगंगा पार्क नाम मिला, और आज जिसे जिम कार्बेट नेशनल पार्क ( जो अब उत्तराखण्ड में है ) कहा जाता है
16.
भारत में सर्व प्रथम उर्दू अकॅडेमी की शुरुवात उत्तर प्रदेश में हुई
17.
उत्तर प्रदेश की प्रथम अनुसूचीत जाती की पहली महिला मुख्यमंत्री मायावती बनी थी
उत्तर प्रदेश की प्रथम महिला मुख्यमंत्राी का नाम सुचेता कृपलानी है.
2.
उत्तर प्रदेश की पहिला राज्यपाल महिला श्रीमती सरोजनी नायडू थी
3.
उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री श्री गोविन्द बल्लभ पंत थे.
4.
उत्तर प्रदेश का प्रथम हिंदी दैनिक समाचार पत्र हिन्दोस्तान का प्रकाशन 1887 ई मे प्रतापगढ़ में हुआ जिसे कालाकांकर के राजा रामपाल सिंह ने शुरु किया था
5.
उत्तर प्रदेश का प्रथम हिंदी साप्ताहिक ‘बनारस अखबार’ जनवरी 1945 में काशी बनारस से प्रकाशित हुआ
6.
उत्तर प्रदेश में प्रथम अंग्रेजी दैनिक ‘लीडर’ का प्रकाशन सन 1990 ई में पं. मदनमोहन मालवीय ने इलाहाबाद से प्रारंभ किया
7.
उत्तर प्रदेश के हिंदी के प्रथम गंभीर चिन्तन निबंधकार और आलोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल थे
8.
उत्तर प्रदेश का प्रथम विश्व विदयालय इलाहाबाद विश्व विदयालय है जिसकी स्थापना 1887 ई मे हुई थी1791 में बनारस में रेजिडेंट डेकन ने प्रथम संस्कृत महाविदयालय की स्थापना की थी जिसमें हिन्दु धर्म, साहित्य एवं कानुन की शिक्षा की व्यवस्था थी
9.
उत्तर प्रदेश तथा भारत की आर्मी की प्रथम महिला ब्रिगेड रानी झाांसी ब्रिगेड थी, जो 23 अक्टूबर 1943 ई को ब्रिगेड बनी
10.
भारत वर्ष तथा उत्तर प्रदेश में 1956 ई मे प्रथम खेलकूद परिषद की स्थापना हुई थी
11.
प्रदेश की पहली महिला वकील कारनेलिया सोराबजी थी जो 1923 ई में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकील थी
12.
भारत वर्ष तथा उत्तर प्रदेश में सर्व प्रथम ट्रैक्टर का प्रयोग उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खोरी में सरदार जोगेंद्र सिंह ने 1904 में किया था
13.
भारत वर्ष तथा उत्तर प्रदेश में सबसे पहली सीधी ट्रंक डयलिंग सेवा लखनऊ कानपुर के बीच 26 नवम्बर 1960 ई को शुरु की गई थी
14.
भारत का पहला ग्रामीण बँक मुरादाबाद और गोरखपुर में 2 अक्टुंबर 1975 को खुला
15.
भारत का पहला राष्ट्रीय पार्क 1936 में स्थापित हेली पार्क है जिसे आजादी के बाद रामगंगा पार्क नाम मिला, और आज जिसे जिम कार्बेट नेशनल पार्क ( जो अब उत्तराखण्ड में है ) कहा जाता है
16.
भारत में सर्व प्रथम उर्दू अकॅडेमी की शुरुवात उत्तर प्रदेश में हुई
17.
उत्तर प्रदेश की प्रथम अनुसूचीत जाती की पहली महिला मुख्यमंत्री मायावती बनी थी
UPP Syllabus
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड
पाठ्यक्रम (पुलिस आरक्षी
प्रारम्भिक लिखित परीक्षा का पाठ्यक्रम
प्रारम्भिक लिखित परीक्षा के प्रश्नपत्र की शैली
क्र0सं0
1 सामान्य ज्ञान एवं सामयिक विषय. 150
2 तार्किक क्षमता. 75
3 आंकिक क्षमता कुल योग. 75
Total. 300
1सामान्य ज्ञान एवं सामयिक विषय (General knowledge and Current affairs) (क) सामान्य ज्ञान(General knowledge)
History-इतिहासcultureसंस्कृति, Geographyभूगोल, Economics-अर्थशास्त्र, Indian constitutionभारतीय संविधान, SportsखेलLiterature-साहित्य, Scienceविज्ञानSpecific knowledge about Education, culture and Social custom of Uttar Pradeshउत्तर प्रदेश की शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक प्रथा के सम्बन्ध में विशिष्ट जानकारी,
Revenue, Police and General Administration System in Uttar Pradeshउत्तर प्रदेश में राजस्वपुलिस व सामान्य प्रशासनिक व्यवस्थाProtection of Women and Childrenमहिला और बच्चों का संरक्षण
Basics/Fundamental of Information & Communication Technology-सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का मौलिक आधारभूत ज्ञानEnvironmental Studiesपर्यावरणीय ज्ञान, Basics of LanguageHindi Grammar-भाषा का मौलिक ज्ञानहिन्दी व्याकरण।
(ख) सामयिक विषय (Current affairs)
Current events of National and International importance-राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएंImportant Personalitiesमहत्वपूर्ण व्यक्तित्व, Appointmentsनियुक्तियां Prizeपुरस्कार, Important Placesप्रमुख स्थलMain Committees and Commissionsप्रमुख समितियां एवं आयोगBuming Issues and Disputesज्वलन्त मुद्दे एवं विवादMajor Settlementsप्रमुख समझौते Judicial Decisions न्यायिक निर्णयBooks and Authorsपुस्तक और लेखक, Abbreviationsसंक्षिप्त रुप, Miscellaneous -विविध।
2-तार्किक क्षमता (Reasoning Ability)
Analogies समरूपता, Similarities समानता, Differencesभिन्नताSpace visualizationखाली स्थान भरना, Problem solving-समस्या । को सुलझाना, Analysis and Judgementविश्लेषण और निर्णयDecision-makingनिर्णायक क्षमता. Visual memory-इश्य स्मृति, Discrimination विभेदन क्षमता, Observationप्रेक्षणRelationship-सम्बन्धConcepts-अवधारणा, Arithmetical reasoningअंकगणितीय तर्क, Verbal and figure classificationशब्द और आकृति वर्गीकरण Arithmetical number series अंकगणितीय संख्या श्रृंखलाAbilities to deal with abstract ideas and symbols and their relationshipsअमूर्त विचारों व प्रतीकों तथा उनके सम्बन्धों से
क्र0सं0
1 सामान्य ज्ञान एवं सामयिक विषय. 150
2 तार्किक क्षमता. 75
3 आंकिक क्षमता कुल योग. 75
Total. 300
1सामान्य ज्ञान एवं सामयिक विषय (General knowledge and Current affairs) (क) सामान्य ज्ञान(General knowledge)
History-इतिहासcultureसंस्कृति, Geographyभूगोल, Economics-अर्थशास्त्र, Indian constitutionभारतीय संविधान, SportsखेलLiterature-साहित्य, Scienceविज्ञानSpecific knowledge about Education, culture and Social custom of Uttar Pradeshउत्तर प्रदेश की शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक प्रथा के सम्बन्ध में विशिष्ट जानकारी,
Revenue, Police and General Administration System in Uttar Pradeshउत्तर प्रदेश में राजस्वपुलिस व सामान्य प्रशासनिक व्यवस्थाProtection of Women and Childrenमहिला और बच्चों का संरक्षण
Basics/Fundamental of Information & Communication Technology-सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का मौलिक आधारभूत ज्ञानEnvironmental Studiesपर्यावरणीय ज्ञान, Basics of LanguageHindi Grammar-भाषा का मौलिक ज्ञानहिन्दी व्याकरण।
(ख) सामयिक विषय (Current affairs)
Current events of National and International importance-राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएंImportant Personalitiesमहत्वपूर्ण व्यक्तित्व, Appointmentsनियुक्तियां Prizeपुरस्कार, Important Placesप्रमुख स्थलMain Committees and Commissionsप्रमुख समितियां एवं आयोगBuming Issues and Disputesज्वलन्त मुद्दे एवं विवादMajor Settlementsप्रमुख समझौते Judicial Decisions न्यायिक निर्णयBooks and Authorsपुस्तक और लेखक, Abbreviationsसंक्षिप्त रुप, Miscellaneous -विविध।
2-तार्किक क्षमता (Reasoning Ability)
Analogies समरूपता, Similarities समानता, Differencesभिन्नताSpace visualizationखाली स्थान भरना, Problem solving-समस्या । को सुलझाना, Analysis and Judgementविश्लेषण और निर्णयDecision-makingनिर्णायक क्षमता. Visual memory-इश्य स्मृति, Discrimination विभेदन क्षमता, Observationप्रेक्षणRelationship-सम्बन्धConcepts-अवधारणा, Arithmetical reasoningअंकगणितीय तर्क, Verbal and figure classificationशब्द और आकृति वर्गीकरण Arithmetical number series अंकगणितीय संख्या श्रृंखलाAbilities to deal with abstract ideas and symbols and their relationshipsअमूर्त विचारों व प्रतीकों तथा उनके सम्बन्धों से
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